ICC शेड्यूलिंग संकट और गहराया, मैदान के बाहर के विवादों से ग्लोबल क्रिकेट कैलेंडर बाधित हुआ

ICC शेड्यूलिंग संकट और गहराया: एक समय था जब एशियाई क्रिकेट बोर्ड अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एकजुट होकर फैसले लेते थे। भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया 1996 का वनडे वर्ल्ड कप उस दौर की सबसे बड़ी मिसाल है।

लेकिन मौजूदा समय में हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट राजनीति, सुरक्षा चिंताओं और व्यावसायिक दबावों के बीच फंसा हुआ है, जिससे ICC के लिए टूर्नामेंट शेड्यूल करना किसी बुरे सपने से कम नहीं रह गया है

Bangladesh
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बांग्लादेश का इनकार बना नया विवाद

आगामी ICC T20 वर्ल्ड कप से पहले सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ, जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने भारत में अपने मैच खेलने से इनकार कर दिया। बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने सभी मुकाबले श्रीलंका में शिफ्ट करने की मांग रखी है।

इस फैसले के पीछे एक अहम वजह यह भी मानी जा रही है कि BCCI ने कोलकाता नाइट राइडर्स को तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान को IPL 2026 से पहले रिलीज करने का निर्देश दिया, जो इस लीग में खेलने वाले एकमात्र बांग्लादेशी खिलाड़ी थे। इस फैसले ने भारत-बांग्लादेश क्रिकेट संबंधों में और तनाव पैदा कर दिया।

ICC के सामने लॉजिस्टिक संकट

अगर बांग्लादेश की मांग मानी जाती है, तो ICC को अपने पूरे शेड्यूल में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। बांग्लादेश को ग्रुप C में चार लीग मैच खेलने थे—तीन कोलकाता और एक मुंबई में। मैचों के स्थान बदलने का मतलब है कि श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश—तीनों टीमें अपने मुकाबले श्रीलंका में खेलेंगी

इस स्थिति में ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों के मैच भारत में शिफ्ट करने पड़ सकते हैं, जिससे पूरा टूर्नामेंट संतुलन बिगड़ जाएगा। अगर बांग्लादेश ग्रुप C से सुपर-8 में क्वालिफाई करता है, तो आगे के मुकाबलों के लिए और बदलाव करने होंगे। इस ग्रुप में इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, नेपाल और इटली जैसी टीमें शामिल हैं।

पहले से ही अनिश्चित हैं सेमीफाइनल और फाइनल

भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे की धरती पर खेलने से इनकार कर चुके हैं, जिसके चलते सेमीफाइनल और फाइनल के वेन्यू पहले से ही अनिश्चित हैं। अब अगर बांग्लादेश भी इस सूची में जुड़ता है, तो हालात और जटिल हो जाएंगे। फैंस और ब्रॉडकास्ट पार्टनर्स पहले ही इस अनिश्चितता से परेशान हैं।

चैंपियंस ट्रॉफी का उदाहरण

पिछले साल की चैंपियंस ट्रॉफी में भारत ने अपने सभी मैच दुबई में खेले थे। ग्रुप टॉपर दक्षिण अफ्रीका को कराची से दुबई उड़ान भरनी पड़ी, ताकि वे सेमीफाइनल के लिए समय पर पहुंच सकें।

हालांकि बाद में भारत के ग्रुप टॉप करने पर दक्षिण अफ्रीका को वापस लौटना पड़ा और उन्हें सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हार का सामना करना पड़ा। यह उदाहरण बताता है कि टेलर-मेड शेड्यूल किस तरह टीमों को प्रभावित करता है

भारत बना ICC इवेंट्स का केंद्र

आज की हकीकत यह है कि ICC और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के टूर्नामेंट्स के लिए विशेष शेड्यूल बनाना अब सामान्य बात हो गई है। ब्रॉडकास्ट रेवेन्यू और वैश्विक क्रिकेट की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए 8 साल के चक्र में तीन बड़े पुरुष ICC टूर्नामेंट भारत में आयोजित किए जा रहे हैं

  • 2027 अंडर-19 वर्ल्ड कप: बांग्लादेश और नेपाल सह-मेजबान
  • 2029 चैंपियंस ट्रॉफी: भारत
  • 2031 ODI वर्ल्ड कप: भारत और बांग्लादेश सह-मेजबान

फ्रेंचाइज़ी लीग्स पर भी असर

ऑफ-फील्ड विवादों का असर सिर्फ ICC टूर्नामेंट्स तक सीमित नहीं है। SA20 लीग में कोई भी पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं खेलता, क्योंकि इसके सभी फ्रेंचाइज़ी मालिक भारतीय हैं। वहीं ILT20 में चार पाकिस्तानी खिलाड़ी खेले, लेकिन वे सभी एक ही टीम—डेजर्ट वाइपर्स—का हिस्सा थे, जिसकी मालिकाना हिस्सेदारी भारतीय नहीं है।

इंग्लैंड की The Hundred लीग की आठ में से चार टीमों के मालिक IPL फ्रेंचाइज़ी से जुड़े हैं। वहीं बिग बैश लीग (BBL) भी निजी निवेश को लेकर IPL मालिकों से बातचीत कर रही है।

Mustafizur Rahman
Mustafizur Rahman

मुस्ताफिजुर रहमान बने विवाद का केंद्र

IPL ऑक्शन में मुस्ताफिजुर रहमान पर ₹9.2 करोड़ तक की बोली लगी, क्योंकि तीन फ्रेंचाइज़ियों ने उनमें रुचि दिखाई। हालांकि एक IPL फ्रेंचाइज़ी अधिकारी ने माना,

“आप कभी नहीं जानते कि खिलाड़ी की उपलब्धता कब मुद्दा बन जाए। इसी वजह से मुस्ताफिजुर हमारी योजनाओं में नहीं थे।”

आखिरकार, इन सभी विवादों और राजनीतिक खींचतान के बीच सबसे ज्यादा नुकसान खिलाड़ियों को ही उठाना पड़ता है, जो मैदान से बाहर के फैसलों की कीमत चुकाने को मजबूर होते हैं।

निष्कर्ष

जहां एक ओर क्रिकेट को “जेंटलमैन गेम” कहा जाता है, वहीं दूसरी ओर ऑफ-फील्ड राजनीति, सुरक्षा विवाद और व्यावसायिक हित इसे लगातार जटिल बना रहे हैं। ICC के लिए टूर्नामेंट शेड्यूल करना अब सिर्फ खेल का मामला नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक संतुलन बन चुका है।

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